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क्या संवैधानिक मर्यादा भूल गये उत्तराखंड विधानसभा स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल ?

देहरादून ब्यूरो। विधानसभा अध्यक्ष के पद पर आसीन ऋषिकेश के विधायक प्रेमचंद अग्रवाल को संवैधानिक परम्पराओं की कोई फिक्र नहीं है। यदि होती तो वह ऋषिकेश क्षेत्र में आयोजित भाजपा की रैली में शामिल नहीं होते। यह पहला मौका नहीं है जब प्रेमचंद्र अग्रवाल परम्पराओं से इतर इस तरह से दिखायी दिये हुए हो।

इससे पहले भी कई बार पोस्टरों में भी ऐसे ही कुछ देखने को मिल चुका हैं। हालांकि वे खुद इसे किसी संवैधानिक परम्पराओं का हनन न मानते हुए इसे आम आदमी की भावना बता कर रैली में शामिल होने को जायज ठहरा रहे हैं। अग्रवाल ने न सिर्फ रैली में शिरकत की बल्कि इसकी कमान भी खुद अपने हाथों में ले ली और वे सड़कों में आज नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के पक्ष में नारेबाजी करते नजर आये।

ऋषिकेश के श्यामपुर क्षेत्र में रविवार को नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भाजपा की मंडल इकाई ने रैली का आयोजन किया, जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ ही स्थानीय लोगों एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

रैली ठाकुरपुर पंचायत घर से शुरू होकर विभिन्न स्थानों से होते हुये वहीं आकर समाप्त हुई। शुरुआत से समाप्त होने तक विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल रैली की अगुवाई करते हुये सीएए के पक्ष में नारेबाजी करते नजर आये। रैली में शामिल लोग हाथ में भाजपा का झण्डा और बैनर पकड़े हुये थे। विधानसभा अध्यक्ष होते हुये विधायक प्रेमचंद अग्रवाल का राजनैतिक रैली में शामिल होना संवैधानिक परम्परा का उल्लंघन माना जा रहा है।

संविधान में सदन के अध्यक्ष की भूमिका _

1_ अध्यक्ष की कोई राजनीति नहीं होती। वह तटस्थ होता है। अध्यक्ष के पद पर निर्वाचित होने के बाद वह अपने दल की गतिविधियों से अलग हो जाता है।

2_ जैसे ही कोई व्यक्ति अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठता है उसके बाद उससे यह आशा की जाती है कि वह दलों से अपना सम्बंध तोड़ ले। जब वह अध्यक्ष बना जाता है तो उसकी अपनी कोई राजनैतिक राय नहीं रहती है और उसको अपने राजनैतिक मित्रों एवं विरोधियों के साथ एक समान व्यवहार रखना चाहिये।

Mahaveer negi
written by: Mahaveer negi
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