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सरकार की घोषणा-अब उत्तराखंड में हरेला पर हर साल होगी छुट्टी,जमकर लगाओं पेड़

नैनीताल उत्तराखंड में अब हरेला पर्व पर सार्वजनिक छुटटी होगी। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन के लक्ष्य और उद्देश्य तथा जन-जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव बढ़े हैं परन्तु 4.5 साल में यह लक्ष्य पूरा करने के प्रति हम पूरी तरह आशान्वित हैं। मुख्यमंत्री रावत ने घोषणा की कि इस वर्ष हरेला पर 16 जुलाई को अवकाश रहेगा और इस दिन राज्य के लोग पौधे लगाएं। उन्होंने कहा कि सरकार ने आते ही राज्य के 20 लाख शौचालयों के सिस्टन में बिना बजट के एक लीटर की बोतलें डालकर प्रतिदिन एक करोड़ लीटर पानी बचाने का अभियान चलाया था। हरेला पर्व पर अल्मोड़ा में कोसी नदी के तट पर 1.67 लाख, देहरादून में रिस्पना नदी क्षेत्र में 2.5 लाख व हरेला पर 2.24 लाख पौधे लगाए गए।

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन योजना के अन्तर्गत आरएस टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी में गुरुवार को ’’सहभागी स्प्रिंग शेड प्रबन्धन के माध्यम से पहाड़ों में पीने योग्य पानी की व्यवस्था’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने दीप जलाकर किया।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री शेखावत ने जलवायु परिवर्तन एवं तापमान वृद्धि के दुष्परिणाम परिलक्षित हो रहे हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन एवं तापमान वृद्धि पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कस्टोडियन बनकर करना होगा और आने वाली पीढ़ी के लिए संरक्षित करना होगा। वर्तमान समय पानी की मांग लगातार बढ़ रही है परन्तु जल संसाधनो में कमी आ रही है। इसलिए सभी का उद्देश्य होना चाहिए कि प्राकृतिक जल स्त्रोंतों के उपयोग के साथ ही उनके रिचार्च की रणनीति बनाकर कार्य करें ताकि जल स्त्रोंतों में किसी भी प्रकार की कमी न हो।

नया भारत बिना जल प्रबंधन के नहीं हो सकता है। वर्षा से पानी पूर्व की तरह ही प्राप्त हो रहा है परंतु प्रबंधन में कमी आयी है। उन्होंने कहा कि नदियाॅ, तालाब, झरने, सूखने लगे हैं और ग्राउण्ड वाटर लेवल भी गिर रहा है। इनका संरक्षण, संवर्धन एवं पुर्नजीवित करने के लिए कार्यों में गति बढ़ाकर कम समय में अधिक कार्य करने होंगे। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य जल जीवन मिशन योजना के अन्तर्गत पर्वतीय क्षेत्रों में स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट के प्रोटोकाॅल को साझा करना, व्यवस्थित कार्य प्रणाली पर चर्चा एवं निष्कर्स तथा अनुभवों के आधार पर स्प्रिंग शेड प्रबन्धन गतिविधियों के लिए जनता को जागरूक करना व हर घर में नल और हर नल में जल की संकल्पना को साकार करना है।

शेखावत ने कहा कि पिछले 70 सालो में जितने घरो तक पेयजल की आपूर्ति की गयी, उसके सापेक्ष पाॅच वर्षो (2019 से 2024 तक) के लिए लक्ष्य पाॅच गुना बढ़ाकर देश के 15 करोड़ ग्रामीण आवासों तक शुद्ध पेयजल पहुॅचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को राज्यों और केन्द्र सरकार द्वारा आपसी तालमेल से पूरा करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 2024 तक हर घर में नल और हर नल में जल का लक्ष्य रखा है। 3.50 लाख करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान है,

उन्होंने कहा कि सेनिटेशन मिशन पर खर्च धनराशि का 4 गुना लाभ देशवासियों को प्राप्त हो रहा है। इसके कारण महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध घटे हैं, पर्यावरणीय नुकसान में कमी आई है। एक छोटे से मिशन के बहुत दूरगामी परिणाम होते है। पेयजल उपलब्ध कराने से व्यक्तियों में बीमारियों में कमी आयेगी और स्वास्थ्य लाभ होगा। उन्होंने कहा कि जल स्त्रोंतों के सरक्षण, संवर्धन एवं पुर्नजीवन के लिए जनता को जागरूक करना होगा और जनता को जल संकट एवं जल स्त्रोतों के महत्व के बारे में भी दीर्घकालिक परिणामों से अवगत कराना होगा।

उन्होंने उत्तराखण्ड द्वारा जल संरक्षण, संवर्धन एवं नदियों के पुर्नोद्धार कार्यो की प्रशसंा करते हुए कहा उत्तराखण्ड वास्तव में बधाई का पात्र है। उत्तराखंड इस कार्य में पुरस्कृत भी हुआ है। उन्होंने कहा कि पीने का पानी घर तक पहुंचे, साथ ही यह दृष्टिकोण भी बदले और यह सुनिश्चित करें कि जल स्रोत संरक्षित हों। केवल जमीन से पानी निकालने की आदत को छोड़ने और पानी का ट्रीटमेंट करके जमीन में पानी भरने पर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिकारी दृष्टिकोण बदले और यह सुनिश्चित करें कि पानी के दोहन के साथ जल स्त्रोत का वाटर लेवल भी बना रहे।

वाटर लेवल को बनाए रखने के लिए जनपद एवं ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन की योजनाऐं बनायी जायें। उन्होंने मिसाल देते हुए कहा कि पिछले 50 हजार वर्षों से मौजूद नैनीताल की झील को न जाने कितनी पीढ़ियों ने संरक्षित किया होगा परंतु पिछले 50 वर्षों में हमने इसे प्रदूषित किया है। कुमाऊं के आयुक्त राजीव रौतेला के कोसी नदी के संरक्षण के प्रयास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ का पानी व जवानी पहाड़ के काम नहीं आती, इस धारणा को बदलने की जरूरत है। देश मे 260 करोड़ हाथ हैं, वे जुट जाएं तो जल संरक्षण कर देश को जल समृद्ध बनाएं व माताओं-बहनों के जीवन का कष्ट घटाएं।

Mahaveer negi
written by: Mahaveer negi
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